मुंशी प्रेमचंद की पूरी कहानी जाने हिंदी में!

दोस्तों आज हम जानेंगे मुंशी प्रेमचंद के जीवन परिचय के बारे में मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 में वाराणसी जिले के लमही नामक गांव में हुआ था इनकी माता का नाम आनंदी देवी और पिता का नाम शिवराम था| ये लमही डाकघर में डाक मुंशी थे| 7 वर्ष की अवस्था में मुंशी प्रेमचंद की माता का तथा 14 वर्ष की अवस्था में पिता का देहांत हो गया| इनका बचपन एवं किशोर जीवन संघर्ष में रहा इनका मुंशी प्रेमचंद का मूल नाम धनपत राय श्रीवास्तव था

मुंशी प्रेमचंद ने 1898 में मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण कर स्थानीय विद्यालय में शिक्षक नियुक्त हो गए| B.A करने के बाद मुंशी प्रेमचंद शिक्षा विभाग के इंस्पेक्टर पद पर नियुक्त हो गए| मुंशी प्रेमचंद का पहला विवाह उन दिनों की परंपरा के अनुसार 15 साल की उम्र में हुआ जो सफल नहीं रहा 1926 में इन्होंने विधवा विवाह का समर्थन करते हुए बाल विधवा शिवरानी देवी से दूसरा विवाह किया| उनसे तीन संताने हुई श्रीपत राय अमृतराय और कमला देवी श्रीवास्तव 1910 में उनकी रचना सोजे वतन के लिए हमीरपुर के जिला कलेक्टर ने तलब किया तो जीवन की सभी प्रतियां जब्त कर नष्ट कर दी गई इस समय तक प्रेमचंद नवाब राय नाम से उर्दू में लिखे थे उर्दू में प्रकाशित होने वाली जमाना पत्रिका के संपादक और उनके दोस्त मुंशी दया नारायण निगम ने उन्हें प्रेमचंद नाम से लिखने की सलाह दी इसके बाद वे प्रेमचंद के नाम से लिखने लगे|

munshi premchand ki biography

मुंशी प्रेमचंद की पूरी रचनाएँ

प्रेमचंद आरंभिक लेखन जमाना पत्रिका में किया जीवन के अंतिम दिनों में गंभीर रूप से बीमार पड़े उनका उपन्यास मंगलसूत्र पूरा नहीं हो सका और लंबी बीमारी के बाद 8 अक्टूबर 1936 को उनका निधन हो गया उनका अंतिम उपन्यास मंगलसूत्र उनके पुत्र अमृतराय ने पूरा किया उपन्यास के क्षेत्र में उनके योगदान को देखकर बंगाल के विज्ञान उपन्यासकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय उपन्यास सम्राट कहकर संबोधित किया था|

प्रेमचंद ने हिंदी कहानी और उपन्यास की एक ऐसी परंपरा का विकास किया जिसने पूरी सदी के साहित्य का मार्गदर्शन कराया आगामी एक पूरी पीढ़ी को प्रभावित कर प्रेमचंद ने साहित्य की यथार्थवादी परंपरा की नींव रखी| प्रेमचंद संवेदनशील लेखक सचेत नागरिक तथा विद्वान संपादक थे उनके पुत्र अमृतराय ने ही मुंशी प्रेमचंद को कलम का सिपाही नाम दिया है|

मुंशी प्रेमचंद की रचनाएँ

आपको बता की मुंशी प्रेमचंद रचनाओं में सबसे पहले आते हैं उनके उपन्यास गोदान 1936 गबन 1931 सेवा सदन 1918 कर्मभूमि 1920 वरदान 1921 प्रेमाश्रम 1921 रंगभूमि 1925 निर्मला 1927 प्रतिज्ञा कायाकल्प 1926 मंगलसूत्र 1948 में लिखा था|

प्रेमचंद की कहानियां इस प्रकार से है पंच परमेश्वर, कफन, नमक का दरोगा, बूढ़ी काकी, नशा, परीक्षा, ईदगाह, बड़े घर की बेटी, सुजान भगत, शतरंज के खिलाड़ी, माता का हृदय, मिस पदमा, बलिदान, दो बैलो की कथा, तथा पूस की रात, सौत कजाकी, प्रेमचंद की पहली कहानी संसार का अनमोल रत्न 1960 में जमाना पत्रिका में प्रकाशित की गयी थी|

प्रेमचंद के उपन्यास भारत और दुनिया की कई भाषाओं में अनुदित कोई खास कर उनका सर्वाधिक चर्चित उपन्यास गोदान सेवा सदन एक नारी के वेश्या बनने की कहानी है| प्रेमाश्रम किसान जीवन पर लिखा हिंदी का संभवत पहला उपन्यास है यह अवध के किसान आंदोलनों के दौर में लिखा गया रंगभूमि में प्रेमचंद एक अंधे विकारी सूरदास को कथा का नायक बनाकर हिंदी कथा साहित्य में क्रांतिकारी बदलाव का सूत्रपात कर चुके थे गोदान का हिंदी साहित्य ही नहीं विश्व साहित्य में भी महत्वपूर्ण स्थान है प्रेमचंद ने सेवा सदन 1918 उपन्यास से हिंदी उपन्यास की दुनिया में प्रवेश किया यह मूल रूप से उन्होंने बाजार ए हुस्न नाम से पहले उर्दू में लिखा इसका हिंदी रूप सेवा सदन पहले प्रकाशित कराया|

साहित्यिक विशेषताएं इनकी रचनाओं में भारत के दर्शन होते हैं मुंशी प्रेमचंद के साहित्य पर गांधीवाद का प्रभाव दिखाई देता है साहित्य को समाज का दर्पण नहीं मशाल में होना चाहिए यह बोलते थे प्रेमचंद|

उम्मीद है की आपलोग को मुंशी प्रेमचंद के बारे में आपको अच्छा लगा होगा| आपको ये मेरा पोस्ट अच्छा लगा होतो आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों में शेयर जरूर कर दे|

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